ये भी पढ़ें : लगातार गिरते शेयर मार्केट को उठाने के लिए हुआ बड़ा फैसला, 100 लोगों का दल जाएगा मुंबई छोटे रामदेव, जड़ी बूटियों के बेताज बादशाह, नेपाल के गोपाल... आचार्य बालकृष्ण का दावा है कि वो अंग्रेज़ी दवाइयों का असर चेक करने के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे... आचार्य का कहना है कि कई लोगों ने ये दावा किया था कि इमरजेंसी में पतंजलि की दवाएं ज़्यादा असर नहीं करती हैं... ऐसे में बालकृष्ण ने खुद को बीमार करके ये पता लगाने की कोशिश की कि आखिर अंग्रेज़ी दवाओं में ज़्यादा असर है या नहीं... आचार्य ने मान लिया है कि अंग्रेज़ी दवाओं की ताकत पर सवाल नहीं करना चाहिए... कुछ बकवास सूत्रों के मुताबिक अस्पताल पहुंच कर डॉक्टरों ने इमरजेंसी में आचार्य को एक दो घास और किसी पेड़ की जड़ खाने को दी तो आचार्य गुस्सा हो गए... उन्होंने डॉक्टरों से कहा मज़ाक की जगह उनकी सही दवाओं से इलाज किया जाए... डॉक्टरों ने भी कहा अगर आचार्य चाहें तो उन्हें ग्लूकोस की जगह गाय का दूध चढाया जा सकता है... इस पर भी बालकृष्ण नाराज़ हो गए... इसके बाद डॉक्टरों ने बालकृष्ण को दवाएं दीं... जिसके बाद उनकी तबियत थोड़ी ठीक...
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