देश भर के वैज्ञानिकों ने टीवी सीरियल लिखने वालों का नारको टेस्ट
कराने की मांग की है... इन वैज्ञानिकों का कहना है कि जो कुछ भी टीवी में दिखाया
जाता है... वो लिखने के लिए नशा होना ज़रूरी है... इसी को देखते हुए वैज्ञानिकों
ने कहा है कि टीवी सीरियल लिखने वालों का ड्रग टेस्ट कराने के साथ नारको टेस्ट भी
कराया जाए... ताकि ये पता लग सके कि इनके दिमाग में आखिर चल क्या रहा है...
वैज्ञानिकों ने कुछ सीरियल देखने के बाद ये फैसला किया कि आखिर इन लेखकों की
प्रतिभा और प्रेरणा के स्रोत का पता लगाना बेहद ज़रूरी है...
फिल्मों में ड्रग्स का केस देखते हुए अब ये भी पता लगाना ज़रूरी हो
गया है कि आखिर टीवी सीरियल के लेखकों को रसोड़े और लैपटॉप जैसे आइडिया आते कहां
से हैं... कुछ बकवास सूत्रों का कहना है कि एलियन भारत में इंसानों का दिमाग
बर्बाद करने के लिए ऐसे आइडिया इन लेखकों के दिमाग में डाल देते हैं... तो कुछ का
कहना है कि पाकिस्तान और चीन मिल कर भारतीय दर्शकों की बुद्धि भ्रष्ट करने के लिए
ये सब कचरा बनवाते हैं... ताकि लोग ये ही पूछते रह जाएं कि रसोड़े में कौन था और
कोई ये ना पूछ बैठे कि लद्दाख में कौन था...
टीवी सीरियल लिखने के साथ इसमें काम करने वाले कलाकारों की भी जांच की
मांग हो रही है... जिससे ये पता लग सके कि आखिर वो ये कैसे जान जाते हैं कि किस
एपीसोड में उनका पति कौन था... हालांकि टीवी लेखकों ने कहा है कि उन्हें खुद नहीं
पता होता कि आखिर किस एपीसोड में कौन किस से शादी कर लेता है... इन लेखकों का दावा
है कि ज़्यादातर कलाकार सेट पर तय करते हैं कि आज वो किस से शादी करेंगे... लेकिन
एक्टरों का कहना है कि लेखक उन्हें बदनाम करने के लिए ये सब कह रहे हैं... इस बीच
वैज्ञानिकों में इस बात की भी बहस चल रही है कि क्या धोने के बाद लैपटॉप को रस्सी
पर सुखाया जा सकता है या टेबल फैन के सामने रखने के बाद भी लैपटॉप पहले जैसा काम
करने लग जाएगा... बकवास न्यूज़ को डर है कि जिस तरह से टीवी लेखक लॉजिक की लाज
उछाल रहे हैं उससे कहीं दिमागअधिकार संस्था वाले लोग टीवी इंडस्ट्री पर भी केस ना
कर दें...

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