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| प्रतीकात्मक तस्वीर |
सूत्रों के मुताबिक अलग अलग राजनैतिक पार्टियों के आईटी सेल में काम का ज़बर्दस्त दबाव है जिसकी वजह से कई बार विरोधी पार्टियों में काम करने वाले युवक एक ही टार्गेट होने की वजह से एक दूसरे की मदद भी कर दिया करते हैं... ऐसे युवकों पर भी सभी पार्टियों की नज़र है... पार्टियों को ये भी शक है कि कुछ लोग अलग अलग शिफ्ट में अलग पार्टियों का ऑनलाइन समर्थन करते हैं लेकिन इन्हें पकड़ पाना काफी मुश्किल है... फिलहाल विधानसभा और लोकसभा चुनाव करीब आने के बाद इन युवकों पर दबाव काफी बढ़ गया है और अगर ये 17 कार्यकर्ता निकाले जाते हैं तो दूसरी पार्टियां उन्हें तुरंत काम पर रखने को तैयार हैं... माना जा रहा है इसके लिए ये राजनैतिक दल दूसरी पार्टियों के दफ्तर के सामने कैंप भी लगा सकती हैं ताकि युवाओं को निकाले जाते ही उन्हें नौकरी पर रखा जा सके

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