शनिवार और मंगलवार ने सोमवार को देश की सबसे बड़ी अदालत में एक जनहित याचिका दायर की है. याचिका में शनि और मंगल ने कहा है कि उनके साथ दलितों जैसा व्यवहार किया जा रहा है. उन्हें सदियों से सामाजिक छूआछूत का शिकार बनाया जा रहा है. ब्राह्मणों और सवर्णों की साज़िश के तहत शनिवार और मंगलवार को उन अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है जिनके वो हकदार हैं. शनि और मंगल ने ये भी मांग की है उन्हें भी बाकी दिनों की तरह खुशमिज़ाज और अय्याश होना है इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जाए. अपनी याचिका में उन्होंने कई मांगें रखी हैं..
1. शनिवार और मंगवार को दारू,चिकेन,मटन जैसी यम्मी चीज़ें खाने पर लगी धार्मिक रोक हटायी जाए
2. सिर्फ शनिवार और मंगलवार को ही भगवान का दिन ना बताया जाए इससे इन दोनों दिनों को अलग होने का अहसास होता है
3. चूंकि शनिवार और मंगलवार को पिछली कई सदियों से इस छूआछूत का सामना करना पड़ रहा है इसलिए उन्हें कम से कम 33 फीसदी आरक्षण दिया जाए
4. ब्राह्मणों और दूसरी अगड़ी जातियों को ये मानने के लिए कानून बनाया जाए कि वो इस दिन भी दारू.. चिकन और मटन खाएं वरना वो सज़ा के हकदार होंगे
5. एक और कानून बनाया जाए जिससे उनके साथ वाले बाकी के दिन उनका मज़ाक ना उड़ाएं
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने शनिवार और मंगलवार की इस याचिका पर संज्ञान लिया है और उन्हें आश्वासन दिया है कि देश की सबसे बड़ी अदालत में उन्हें न्याय ज़रूर मिलेगा क्योंकि अब तक वो न्याय ही देते आए हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन ब्राह्मणों और अगड़ी जातियों को भी लाइन हाज़िर किया है जिन्होंने शनिवार और मंगलवार के साथ ऐसी नाइंसाफी की है. मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

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