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| सोनी पर आने वाले सीरियल क्राइम पेट्रोल का एक सीन |
देश में अपराध की घटनाओं को दिखाने के लिए क्राइम पेट्रोल सीरियल को जाना जाता है। दावा किया जाता है कि ये सीरियल सच्ची घटनाओं पर आधारित होता है। लेकिन, अब इस सीरियल के बारे में कहा जा रहा है कि इसकी वजह से पुलिस की छवि बिगड़ती जा रही है। डीजीपी ने गृह मंत्रालय से गुहार लगाई है कि सीरियल में पुलिस की असली छवि को पेश नहीं किया जा रहा है, जिससे उन्हें काम करने में दिक्कत हो रही है, डीजीपी के मुताबिक सीरियल में लगातार पुलिस की चुस्ती के बारे में बात की जाती है। साथ ही ज्यादातर केसों में घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है।
बकवास न्यूज से बात करते हुए एक पुलिस अफसर ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया कि लोग हमें क्राइम पेट्रोल का उदाहरण दे दे कर ताने मारने लगे हैं, यहां तक की उनकी पत्नी ने तो एक बार यहां तक कह दिया कि बार-बार ये कहा जाता है कि पुलिस घटना के बाद आती है, जबकि क्राइम पेट्रोल में कई बार तो घटना होने के पहले ही पुलिस पहुंच जाती है, पुलिस अधिकारी ने लगभग रोनी सूरत बना कर कहा कि आप ही बताइए हमें पहले कैसे पता होगा कि यहां घटना होने वाली है। जब घटना हो जाती है तो हमें सूचना मिलते है और इस सूचना के आधार पर हम लोग मौके पर पहुंचते हैं
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| क्राइम पेट्रोल के बारे में दावा है कि वो सच्ची घटनाओं पर आधारित है |
एक दूसरे पुलिस अधिकारी ने बकवास न्यूज़ को बताया कि क्राइम पेट्रोल वाली पुलिस तो आरोपी को इतनी जल्दी पकड़ लेती है कि उसे देखकर अपने आप पर शक होने लगता है, बताइए जनाब जो काम पुलिस के लोग एक या दो साल में करते हैं ये लोग 42 मिनट के सीरियल में एक केस को खत्म कर देते हैँ। आप ही बताइए अगर पुलिस ऐसे काम करेगी तो देश में कितने केस बचेंगे, यही नहीं पुलिसवालों को उसमें इतना ईमानदार दिखाया जाता है कि पूछिए मत, अरे भई रिश्वत नहीं ले पाएंगे तो घर परिवार कैसे चलेगा, हर साल एलआईसी की प्रीमियम में भारी रकम जाती है, वो कहां से होगा, परिवार की सुरक्षा और भविष्य की चिंता तो करनी पड़ेगी ना
पुलिस कंट्रोल रूम में काम कर रहे एक हेड कांस्टेबल ने तो इसलिए वीआरएस के लिए अप्लाई कर दिया क्योंकि लोग 100 नंबर पर फोन कर अब क्राइम पेट्रोल का नाम लेकर चिढ़ाया जाने लगा है, रोज़ाना ताने वाले फोन कॉल्स से वो परेशान हो चुके है, अब तो दफ्तर से निकलते वक्त वो अपनी वर्दी भी उतार लेते हैं, सादे कपड़े पहन कर जाते हैं, क्योंकि लोग रास्ते में भी उन पर ताने मारने से नहीं चूकते
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| क्राइम पेट्रोल को दर्शक भी बेहद पसंद करते हैं |
इन्हीं सारी दिक्कतों को देखते हुए डीजीपी ने गृहमंत्रालय को चिट्ठी लिखी है, पत्र में कहा गया है कि जल्दी से ऐसे सीरियलों को बंद करने की सिफारिश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से की जाए, आखिर एक डिपार्टमेंट ही तो दूसरे डिपार्टमेंट के काम आएगा, और अगर जल्दी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते तो पुलिसवाले मंत्रालय के अधिकारियों की टहल करने से आनाकानी कर सकते हैं
©BakwasNews
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