दिल्ली में लेफ्ट पार्टियों ने ऐलान किया है कि वो ऐसे सभी लोगों को निकाल देगी तो दाहिने हाथ से काम करते हैं... पार्टी का कहना है कि लेफ्ट पार्टी में राइट हैंड से काम करने वालों की कोई जगह नहीं है... इसलिए दाहिने हाथ वालों को हटाया जाएगा... जेएनयू में छात्र संघ में मिली जीत को पार्टी ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ जनमत मान लिया है और यही वजह है कि दाएं हाथ वालों को हटाया जाएगा ताकि ये साफ किया जा सके कि लेफ्ट पार्टियां राइटिस्ट नहीं है... इससे लेफ्ट पार्टी में भगदड़ मच गई है... नेताओं को समझ ही नहीं आ रहा... क्योंकि कभी किसी ने इस बारे में सोचा ही नहीं... लेकिन पार्टी के नेताओं का मानना है कि दाहिने हाथ से काम करने वाले असल में राइट फासिस्ट हो सकते हैं... पार्टी का दावा है कि कई बड़े तानाशाह सीधे हाथ से काम करते थे... इसलिए राइट हैंड से काम करने वालों में फासिस्ट होने की संभावना ज़्यादा होती है... लेफ्ट और राइट की लड़ाई ने सभी वैज्ञानिक आधार तोड़ दिए हैं... दूसरी तरफ दक्षिणपंथी पार्टियों ने इस बात से इनकार किया है कि वो उल्टे हाथ से काम करने वालों को निकालेंगे

डॉक्टरों का दावा है कि दाएं वो बाएं हाथ का विचारधारा से कोई लेना देना नहीं है... लेकिन इस पर लेफ्ट पार्टियों ने सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि ऐसे डॉक्टर भी दाएं हाथ से काम करने वाले ही होंगे... लेफ्ट पार्टियों को लगने लगा है कि देश में हर वो शख्स उनका दुश्मन है जो उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता... अब लेफ्ट पार्टी इस बात की तरफ ध्यान दे रही हैं कि कितने देशद्रोह की बातें करने वाले बाएं हाथ से काम करते हैं... अगर ऐसा हुआ तो पार्टी उनका बचाव करेगी
लेफ्ट पार्टियों के इस फैसले का कोई वैज्ञानिक आधार नज़र नहीं आ रहा है... वैसे तो विशेषज्ञों का मानना है कि लेफ्ट पार्टियों का भी वैज्ञानिक आधार नज़र नहीं आता लेकिन फिर भी ताज़ा फैसले से अजीब तर्कों की लिस्ट में एक और तर्क शामिल हो गया है
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