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| दिल्ली में है जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय |
जेएनयू में पढ़ने की चाहत रखने वाले राजबीर को उस वक्त मां की चप्पल खानी पड़ी जब उसने लौकी बनाए जाने के विरोध में घर में ही नारेबाज़ी शुरू कर दी... राजबीर का क्रांति का भूत 5 मिनट में चप्पल आरती से उतर गया... उसके बाद से राजबीर ने शांति से लौकी खाई भी और मां के हाथ के खाने की तारीफ भी की... असल में पूरा वाकया तब हुआ जब नांगलोई में रहने वाले राजबीर सिंह ने रात को खाने के वक्त नारेबाज़ी शुरू कर दी... उसका कहना था कि जब देश में पनीर मौजूद है तो उसके जैसे मासूम छात्र को लौकी क्यों खिलाई जा रही है... राजबीर का आरोप था कि उसकी मां पूंजीवादी है जो गरीब छात्रों का शोषण करने के लिए ही लौकी बनाती है... ये कहते हुए राजबीर ने डाउन विद डिक्टेटरशिप, डाउन विद फासिज़्म का नारा लगाना शुरू कर दिया... उसका आरोप था कि घर में उसकी मां की तानाशाही की वजह से ही बाकी घरवाले भी कुछ नहीं बोलते हैं...
जैसे ही राजबीर ने नारेबाज़ी शुरू की पहले तो उसकी मां ने सोचा कि वो मज़ाक कर रहा है... लेकिन जब उसका हंगामा बढ़ गया तो मां के साथ पिता ने भी समझाने की कोशिश की... इसके बाद भी जब वो नहीं माना तो मां ने चप्पलों से सारा कम्यूनिज़म सुजा दिया... सिर्फ 5 मिनट की सेवा के बाद राजबीर शांत हो गया... उसके बाद न सिर्फ उसने लौकी खाई बल्कि उसकी तारीफ भी कहा और मां को कहा कि वो अगले 7 दिन तक लगातार तीनों वक्त लौकी, टिंडा, तोरी ही बनाए...
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| जेएनयू में प्रदर्शन कर रहे छात्र |
राजबीर ने बताया कि उसके कुछ दोस्त जेएनयू में पढ़ते हैं जिन्होंने उसे छात्रों पर हो रहे अत्याचार के बारे में बताया... तो उसे भी यही लगा कि घरों में भी मासूम छात्रों पर अत्याचार हो रहा है जिसमें वो भी शामिल है... उसके दोस्त बार बार क्रांति की बात करते थे... लेकिन उसे नहीं पता था कि क्रांति करने से विशेष स्थानों पर सूजन भी आ सकती है... ताज़ा खबर मिलने तक राजबीर ने अपने कॉमरेड दोस्तों से दूरी बना ली है...
©BakwasNews
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