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| यूपी के बागपत में बंदर पर लगा है हत्या करने का आरोप |
हर कोई खुले में साँस लेना चाहता है। चाहे वो बंदर हो या इंसान। कोई भी घुटन में रहना पसंद नहीं करता। इन्सान ने अपनी सहूलियत के हिसाब से जंगलों को काटना शुरू कर दिया है। जिन जंगलों में हज़ारों जानवर रहते थे, उनके आशियानों को उजाड़ दिया गया। तो जंगलों में रहने वाले ये जानवर अब रिहायशी इलाकों में आने लग गए हैं। जब इलाके में घुसपैठ होगी तो ज़ाहिर सी बात है इंसानों और जानवरों में टक्कर होगी ही, UP के बागपत ज़िले में एक बुज़ुर्ग लकड़ी लेने गए तो बंदरों ने पत्थर बरसाकर उसकी जान ले ली। बुजुर्ग के परिवार का आरोप है कि बंदर घात लगाकर बैठे थे जैसे ही बुजुर्ग लकड़ी लेने पहुँचे 20 से ज़्यादा बंदरों ने पत्थरों से हमला कर दिया। मृतक परिवार के साथ हमारी सहानुभूति है लेकिन ये बात गले नहीं उतर रही की बंदर पत्थर लेकर पेड़ पर बैठे थे और उन्होंने बुजुर्ग की किस संगठित आपराधिक गिरोह की भांति हत्या कर दी
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| परिवार चाहता है कि बंदरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो |
ज़रा सोच कर देखिए, बंदरों की ऐसी क्या दुश्मनी रही होगी कि वो किसी शख़्स का इंतज़ार करते हैं एक दो नहीं बीस से ज़्यादा बंदर पेड़ पर पत्थर लेकर चढ़ जाते हैं और जैसे ही वो शख़्स लकड़ी लेने के लिए आता है वो पत्थर बरसाए देते हैं। ये बात हम नहीं कह रहे हैं ये बात पुलिस द्वारा कही जा रही है। इलाक़े में बंदरों पर प्रशासन क़ाबू नहीं पा रहा है तो इसके लिए बंदरों को ही दोषी ठहराना शुरू कर दिया है। कहा तो ये भी जा रहा है कि पीड़ित परिवार ने बंदरों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करने की बात कही है इसके लिए वो आला अधिकारियों से बात करने को भी तैयार है
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| बागपत के टिकरी गांव के रहने वाले धरपाल सिंह की मौत हो गयी है |
कभी मंत्री की भैंस ढूंढने के लिए जाने जाने वाले UP पुलिस पर अब बंदरों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज करने का दबाव बनता जा रहा है, जब पुलिस से इस बारे में पूछा गया तो पुलिस का कहना है कि वो बंदरों के ख़िलाफ़ केस दर्ज नहीं कर सकते क्योंकि इससे जग हँसाई होगी। गज़ब देश है साहब आरोपी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ तो मुक़द्दमे दर्ज होते नहीं है। उल्टा बंदरों पर केस दर्ज करने के लिए दबाव बनाया जाता है या यूँ कहें पुलिस बंदरों को भी आरोपी कह देती है।
©BakwasNews
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