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| मुंबई में इस बार भी बारिश के बाद सड़कें समंदर बन गयी हैं |
मुंबई में हर साल बारिश होती है, हर साल पानी भरता है, हर साल नेता वादा करते हैं लेकिन होता कुछ नहीं है। वादे जस के तस बने रहते हैं। लेकिन , इस बार मुंबई में नेताओं ने नए वादे नहीं किए हैं। बल्कि, इस बार पुराने वादों को बदला जा रहा है। मतलब शुद्ध भाषा में कहा जाए तो पुराने वादों को एडिट किया जा रहा है। अब मुंबई को शंघाई जैसा नहीं, बल्कि वेनिस(इटली) जैसा बनाने की बात की जा रही है। हर साल मुंबई में इतना पानी भर जाता है कि सड़कों पर नाव चलानी पड़ती है। हालात को देखते हुए बीएमसी ने फैसला किया है कि वो पानी नहीं निकाल सकती। इसलिए सड़कों पर नाव चलावाकर लोगों को वेनिस (इटली) जैसी फीलिंग तो दे सकती है। मुंबई का जिम्मा बीएमसी के कंधों पर है, जिस बीएमसी का बजट देश के सात राज्यों के बजट से ज्यादा है वहां हर साल एक जैसे हालात होना बहुत शर्मनाक है। लेकिन, इससे किसी को फर्क भी नहीं पड़ता है। लगातार अलग-अलग बातें की जाती हैं। लेकिन होता कुछ भी नहीं है।
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| इटली का वेनिस शहर दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है |
अब आते हैं चीन के शंघाई शहर की ओर। देश की आर्थिक राजधानी मुबई और चीन के शंघाई शहर की तुलना की जाए तो काफी समानताएं भी हैं और कई असमानताएं भी। दुनिया के दोनों मशहूर शहर समंदर किनारे बसे हैं। मुंबई को हिंदी फिल्मों की जननी कहा जाता है तो वहीं चीनी सिनेमा की शुरुआत के लिए भी शंघाई शहर का नाम सबसे पहले आता है। इसके अलावा कई समानताएं हैं। लेकिन, सबसे बड़ी असमानता जो है वो है मुंबई और शंघाई में वाटर मैनेजमेंट। मुंबई में एक ओर जहां हर साल पानी भरता है तो वहीं शंघाई में ऐसे हालात शायद ही कभी बनते हों।
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| ऐसा दिखता है चीन का शंघाई शहर |
साल 2018 में मुंबई के हालात देखकर अब नेताओं ने शंघाई की बात करनी बंद कर दी। अब मुंबई को इटली के शहर वेनिस जैसा बनाने की बात की जा रही है। इटली का एक सुंदर सा शहर वेनिस, जैसे प्राकृतिक खबूसूरती के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। पूरा शहर पानी से भरा रहता है। लेकिन मुंबई की तरह बिल्कुल नहीं। इस शहर में सड़क नहीं हैं। यहां पानी की छोटी किश्तियां चलाई जाती हैं। अगर बीएमसी अपने काम को इसी तरह जानबूझकर नहीं करती रही तो उम्मीद है कि सरकार की वेनिस बनाने वाली प्लानिंग पूरी हो जाए, वैसे इस बार कई जगहों पर नाव तो चल ही रही है, हालांकि अभी इसे भी सही कदम कहना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि जिस तरह हर साल कैलंडर में साल और तारीख बदल जाती है उसी तरह नेताओं के वादे भी बदल जाते चुनावी कैलेंडर में बदलते रहते हैं
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हर साल दावे किए जाते हैं लेकिन बारिश हर बार बताती है कि दावे झूठे थे
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©BakwasNews
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