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| राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल |
जम्मू कश्मीर में गुरुवार को हुए आतंकी हमले में देश के 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए। वहीं, कई जवान घायल हो गए। आतंकवादियों के कायराना हमले पर पूरा देश गुस्से में है। पूरे देश में शोक की लहर है, शहीदों के परिवार वालों के घरों में मातम का माहौल है। मां अपने बेटे को याद करके रो रही है। किसी मां की कोख सूनी हो गई है तो किसी पत्नी का सुहाग उजड़ गया है, किसी के बच्चों से पिता का साया उजड़ गया है। तो वही देश के 40 नौजवान अब हमारे बीच नहीं रहे। इस पूरी घटना पर देश में गुस्सा है जनता बदला चाहती है, जनता चाहती है कि उन आतंकवादियों को मार गिराया जाए जिन्होंने हमारे जवानों को शहीद कर दिया।
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जिन लोगों पर आतंकवाद को खत्म करने की जिम्मेदारी है वह नेता इस पूरे मामले की निंदा करने में लगे हैं। सरकार से लेकर विपक्ष तक हर कोई निंदा कर रहा है। आजादी के बाद से भारत ने अपने हजारों लाखों जवानों को शहीद कर दिया। लेकिन, हर बार नेता सिर्फ निंदा करते रहे। बार-बार निंदा होती है लेकिन उसके बाद फिर से वही कहानी दोहराई जाती है। अभी कुछ ही दिन तो बीते थे उरी हमले को, जब देश के कई परिवारों के चिराग को बुझ गए थे। मजबूर होना पड़ा था हमें अपने आंसू बहाने के लिए। पाकिस्तान की कायराना हरकत दुनिया ने देखी थी। बताया जा रहा है कि आतंकवाद से निपटने के लिए अब नेताओं ने "निंदा" नाम की मिसाइल खरीदने का फैसला किया है। निंदा मिसाइल को छोड़ने से दुश्मन का तो कुछ नहीं बिगड़ता। लेकिन, अपने आप में हम खुश हो जाते हैं।
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| गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद के शव को कंधा दिया |
नेताओं द्वारा पहले निंदा की जाती है फिर जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है। लेकिन, कहानी बार-बार दोहराई जाती है। सूत्रों से पता चला है कि सरकार निंदा नाम की मिसाइलें खरीद कर जनता को ये संदेश देना चाहती है कि देश के सभी नेता आतंकवाद के खिलाफ हैं। साल 1948 में भी हम आतंकवाद के खिलाफ थे, 1961 में भी नहीं, 1971 में भी। और कारगिल तो आपको याद ही होगा। जब शहीदों की चिताओं पर लगेंगे मेले इस तरीके के गाने गाए जाते थे। लेकिन कभी कोई समाधान नहीं निकला। उम्मीद करते हैं कि नेता निंदा के अलावा कुछ और भी करेंगे और आतंकवाद का नामोनिशान मिटा देंगे। जम्मू कश्मीर में शहीद हुए जवानों को हमारी तरफ से श्रद्धांजलि।
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