शिवसेना का बयान - हिंदुत्व के नाम पर मिले वोट तो पुल गिरने पर जवाब क्यों दें, राज ठाकरे ने कहा- उत्तर भारतीयों की वजह से टूटा पुल
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| मुंबई में अंधेरी स्टेशन पर 3 जुलाई को पुल गिर गया जिसमें 5 लोग जख्मी हुए हैं |
पिछले 22 साल से लगातार और बीच के चार साल को छोड़ दें तो 1985 से बीएमसी पर काबिज शिवसेना ने अंधेरी स्टेशन पर गिरे पुल पर ये कहकर जवाब देने से मना कर दिया कि पुल गिरने की जवाबदेही किसी भी एंगल से उसकी नहीं बनती, पत्रकारों ने जब पूछा कि पुल की मरम्मत और देखरेख का ज़िम्मा तो बीएमसी का है तो शिवसेना का कहना था कि जब उन्होंने बीएमसी चुनाव में वोट मांगा था तो एजेंड में मुंबई शहर की व्यवस्था ठीक करना, या विकास करना शामिल नहीं था, उन्होंने हिदुत्व के नाम पर वोट मांगा, लोगों ने हिंदुत्व के नाम पर वोट दिया, उनकी जीत हुई, अब इसमें पुराने पुल की मरम्मत, सीवर सिस्टम को ठीक करने जैसी बातें कैसे आ सकती हैं, और पुल गिरने की जिम्मेदारी बीएमसी पर थोपना ये तो सरासर गलत है, ये तो रेलवे जाने और बीजेपी के रेल मंत्री जानें
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| शिवसेना कह रही है कि अंधेरी स्टेशन पर पुल गिरने की जिम्मेदारी बीएमसी की नहीं है |
शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत का कहना था कि मुंबई लोकल की वेस्टर्न लाइन और सेंट्रल लाइन को मिलाकर 103 पुल कभी भी गिर सकते हैं, उन्हें फौरन नया बनाने की ज़रूरत है, इसका खुलासा तो रेलवे ने खुद अपने सर्वे में किया था, कायदे से तो रेलवे को ये काम करना चाहिए, अब ये अलग बात है कि जबतक शिवसेना और बीजेपी एक साथ थे तो भाईबंदी में बीएमसी पुलों की मरम्मत करवा देती थी, कहीं नया पुल बनाना होता था तो कुछ पैसे वगैरह दे देती थी, लेकिन रेलवे को सोचना चाहिए कि अब पुरानी वाली बात नहीं रही, और बीएमसी का बजट सिर्फ 37 हज़ार करोड़ रूपए का है, इतने में पूरी मुंबई का, खुद का, पार्टी का और कॉर्पोरेटर्स का ख्याल रखना हर दिन मुश्किल होता जा रहा है
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| राज ठाकरे ने कहा है कि पुल उत्तर भारतीयों की वजह से गिरा है |
उधर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई और एमएनस के मुखिया राज ठाकरे तो दो कदम और आगे निकल गए, 43 साल पुराने पुल के गिरने के लिए उत्तर भारतीयों को जिम्मेदार ठहरा दिया, राज ठाकरे के मुताबिक यूपी और बिहार से आए लोग कई दशकों से मुंबई में रह रहे हैं, लेकिन अभी भी जितनी राज्यभक्ति मराठियों में है उतनी उत्तर भारतीयों में नहीं है, वो इस शहर को अपना मानते ही नहीं है, पुल का इस्तेमाल करने वालों में उत्तर भारतीय ज्यादा होते हैं, मराठियों की संख्या तो बहुत कम है, इसलिए पुल गिरने के ज़िम्मेदार सिर्फ और सिर्फ उत्तर भारतीय हैं
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| 29 सितंबर 2017 को एलिफिंस्टन में पुल गिरा था, 23 लोगों की मौत हुई थी |
मुंबई में पुल गिरना कोई नई बात नहीं है। कुछ महीने पहले भी एक पुल गिरने से कई दर्जन लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त भी ऐसी ही राजनीति हुई थी लेकिन काश राजनीति की जगह कुछ काम किया होता या घटना से सबक लिया होता हो जनता कोई ये दिन देखना न पड़ता, कभी गाय की बात की जाती है, कभी अलग-अलग नारों की बात की जाती। कभी कुछ ना बोलने पर देश से बाहर भेजने के लिए कह दिया जाता है। लेकिन आम आदमी की जान की कोई परवाह नहीं करता, एक इंसान की जान मुफ्त है इस देश में
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